ब्लॉग फीड, किसी भी ब्लॉग का एक महत्वपूर्ण अंग| वह फीड ही होती है जिसको आपके पाठक सब्सक्राइब कर सकते हैं, पाठक चाहें ई-मेल सब्सक्रिप्शन लें, चाहे किसी फीड रीडर में, वह आपके ब्लॉग की फीड को ही सब्सक्राइब कर सकते हैं|

फीड के आकार को निर्धारित करते समय उदार बनें, ना सिर्फ पूरा लेख बल्कि लेख के साथ में अपने कुछ पुराने लेखों का लिंक भी पाठकों को प्रदान करें| आपकी इस उदारता का फायदा आपको अधिक लेख पढ़े जाने के रूप में मिलेगा  |

                                                                                            –योगेन्द्र पाल

हर ब्लोगर चाहता है कि उसके ब्लॉग के ज्यादा से ज्यादा सब्सक्राइबर हों, क्यूंकि सब्सक्राइबर एक प्रकार का आजीवन सदस्य होता है और कोई आपके ब्लॉग पोस्ट को पढ़े या ना पढ़े पर सब्सक्राइबर के फीड रीडर अथवा ईमेल में आपका पोस्ट डिलीवर होगा ही और एक नजर तो वह उस पर डालेगा ही|

फीड का आकार छोटा देने के पीछे ब्लोगरों के मन में मुख्यतया ये लालच होता है कि

  1. उनकी पोस्ट को उनके अपने ब्लॉग पर पढ़ा जाये ना कि किसी अन्य जगह जैसे कि फेसबुक, ई-मेल इत्यादि पर| फेसबुक पर पाठकों से ब्लोगरों के इस प्रकार के अनुरोध आसानी से पढ़े जा सकते हैं कि कृपया मेरे ब्लॉग पर आकर इस लेख को पढ़े| तथा,
  2. लेख को यदि उनके ब्लॉग पर पढ़ा जाएगा तो एडसेंस, एफिलिएट इत्यादि के जरिये होने वाली आय भी बनी रहेगी|

इसी लालच के चलते हुए अधिकतर ब्लोगर अपने ब्लॉग की फीड को पूरा प्रकाशित नहीं करते बल्कि उसको छोटा अथवा जंप ब्रेक तक प्रकाशित करते हैं| ऐसा करने के पीछे उनकी सोच यह रहती है कि अधूरी पोस्ट पाठक के मन में जिज्ञासा उत्पन्न कर देगी और पूरा लेख पढ़ने के लिए उनको आपके ब्लॉग पर आना ही पड़ेगा| पर इससे कुछ समस्याएं उत्पन्न होतीं हैं उदाहरण के लिए-

  • कोई भी फुल साइट मोबाइल डिवाइस में खुलने में दिक्कत होती है पर गूगल रीडर इस समस्या को हल कर देता है, जब भी किसी फीड को गूगल रीडर में सब्सक्राइब किया जाता है तो उतना ही लेख गूगल रीडर में दिखता है जितना आपने फीड में दिया होगा, यदि आपने फीड में लेख का थोडा सा हिस्सा ही दिया है तो सिर्फ वही दिखेगा और पाठक को मोबाइल डिवाइस पर पूरा लेख पढ़ने में दिक्कत होगी और वह पूरा लेख या तो पढ़ेगा ही नहीं या फिर परेशानी के साथ पढ़ेगा| ठीक ऐसा ही ई-मेल सब्सक्रिप्शन के साथ भी होता है|
  • ब्लॉग-स्पॉट पर गूगल ने कुछ डायनेमिक व्यू उपलब्ध कराये हैं जो कि फीड के पूरा होने पर ही कार्य करते हैं, यदि आप पूरे लेख को फीड में नहीं दिखायेंगे तो आप इन साफ-सुथरे व्यू को अपने ब्लॉग में लागू नहीं कर पायेंगे|

यदि मैं आपको इन दोनों समस्याओं का हल बता दूं तब तो आप मेरी बात मानेंगे? तो लीजिए पेश है इन दोनों समस्याओं के हल

  • अपने पूरे लेख को फीड में देने के वावजूद आप पाठक को अपने ब्लॉग पर ला सकते हैं, इसके लिए आपको बहुत सावधानी के साथ अपने नए लेख में अपने पुराने लेखों के लिंक देने हैं| यदि आप अपने पुराने लेखों के लिंक अपने नए लेख में देंगे तो आपके लेख को पढते समय पाठक उन लिंक पर क्लिक करके ना सिर्फ आपके ब्लॉग पर आ सकता है बल्कि आपके ब्लॉग के पुराने लेखों को भी पढ़ सकता है| लिंक देते समय यह याद रखें कि आपके लेख के अनुरूप ही लिंक दिए गए हैं जैसे कि इस लेख को लिखते समय मैं यह बता सकता हूँ कि आप फीड के आकार को गूगल ब्लॉगर में कैसे बदलें| यह लिंक ना सिर्फ इस लेख के अनुरूप है बल्कि यह उन पाठकों को मेरे इस लेख को पढ़ने के लिए भी प्रेरित करेगा जिनको ब्लॉग-स्पॉट में फीड का आकार बदलना नहीं आता|
  • गूगल एडसेंस से होने वाली आय में कोई फर्क ना पड़े इसके लिए गूगल एडसेंस को अपने ब्लॉग की फीड पर लागू कीजिये|
  • इसके अलावा यदि आप फीड-बर्नर का प्रयोग करते हैं तो आप अपनी पोस्ट के साथ में सोशल नेटवर्किंग के लिंक, कमेन्ट के लिंक, ई-मेल के लिंक इत्यादि भी दे सकते हैं यानि कि आपको नुकसान कहीं पर नहीं है चारों तरफ से फायदा ही फायदा है

उम्मीद तो यही है कि अब आपके पूरे लेख को मैं अपने मोबाइल में पढ़ पाऊंगा और आपके पिछले लेखों के लिंक भी मिलेंगे| इस लेख को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और सभी ब्लोगरों को उदार बनाएँ 🙂

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