यह लेख उन लोगों के लिए ख़ास तौर पर लिखा जा रहा है जिनको यह लगता है कि एक वेबसाईट बन जायेगी और पैसा बरसने लगेगा।

मेरे पास फोन आते हैं लोग वेबसाईट बनबाना चाहते हैं, जब मैं उनसे पूछता हूँ कि आपका बिजनेस प्लान भेज दीजिये मैं आपको बेहतर सुझाव दे दूंगा कि आपको वेबसाईट किस प्रकार की चाहिए और उसमें क्या-क्या फंक्शन होने चाहिए। इस पर उनका जबाब होता है (लगभग सभी का) कि ऐसा ऐसा कर लेंगे फिर वैसा वैसा कर लेंगे।

ऐसे लोगों को जब यह समझाया जाए कि भाई वेबसाईट आपके बिजनेस को सपोर्ट करेगी यह अपने आप में बिजनेस नहीं है और अगर है भी तो उसके लिए भी बिजनेस प्लान चाहिए। तो उनको समझ में नहीं आता है उनको लगता है कि जब बाकी वेबसाईट बाले इतना कमा रहे हैं तो हम भी कमा सकते हैं। ऐसा सोचते समय वह यह भूल जाते हैं कि जो कमा रहे हैं उन्होंने टीम लगाई हुई है तब कमा रहे हैं, प्लान के अनुसार चलते हैं तब कमा रहे हैं।

मेरे पास दो उदाहरण हैं-

मेरे एक मित्र का फोन आया कि एक वेबसाईट बनबाना चाहते हैं लगभग  OLX जैसी। मैंने कहा ठीक है बिजनेस प्लान भेज दीजिये। उधर से जबाब आया कि बिजनेस प्लान की क्या जरूरत है OLX जैसी वेबसाईट चाहिए जिसमें कोई भी एड पोस्ट कर सकता है बाद में हम उसे प्रमोट करने के लिए कुछ फीस रख देंगे।

जब मैंने पुछा कि एड पोस्ट होगा उसको अप्रूव कौन करेगा तो बोले कि उसको मैं करूंगा या फिर कोई कर्मचारी रख लेंगे। मतलब उन्होंने ठीक से सोचा ही नहीं कि एड जब पोस्ट होगा तो उसको कौन अप्रूव करेगा कैसे करेगा इत्यादि।

वेबसाईट बन कर तैयार हुई वह पूरी तरह से संतुष्ट थे पर एड अप्रूव ही नहीं कर पा रहे थे। तब निश्चित किया गया कि बिना अप्रूवल के एड पब्लिश किये जाएँ। मैंने वह भी कर दिया अब समस्या आई कि ऐसे एड आने लगे जो वेबसाईट पर नहीं दिखाए जा सकते थे जैसे – सैक्स से सम्बंधित, नशीली दवाओं से सम्बंधित इत्यादि। कोई भी उन एड को अप्रूव करने वाला नहीं था, तो नतीजा वही हुआ जो होना था। वेबसाईट पर विजिटर आने कम हो गए तो धीरे-धीरे उनका मन भी वेबसाईट से हट गया और आज वेबसाईट बंद है।

पर असली समस्या आज भी वही है कि उनको अभी भी लगता है कि बिना बिजनेस प्लान के वेबसाईट दुबारा चलाई जा सकती है।

मेरे द्रुपल के वीडियो ट्यूटोरियल देखने के बाद एक व्यक्ति का मेरे पास फोन आया कि एक न्यूज वेबसाईट बनानी है। मैंने उनसे पुछा कि बिजनेस प्लान क्या है? तो उनका भी उत्तर दो वाक्यों में आ गया। न्यूज वेबसाईट बनायेंगे जिसमें कोई भी व्यक्ति खुद को रिपोर्टर की तरह रजिस्टर कर सकता है और अपने क्षेत्र की रिपोर्ट डाल सकता है।

मैंने जब उनसे पुछा कि रिपोर्टर को आप कहाँ से तनख्वाह देने वाले हैं तो बोले हमारे यहाँ रिपोर्टर को तनख्वाह नहीं देनी पड़ती। मैंने सोचा चलो जो भी हो मुझे तो अपना काम करने से मतलब सो वेबसाईट बना कर उनको दे दी।

वेबसाईट बनाने के दौरान यह पता लगा कि वह पहले से ही इसी न्यूज चैनल के लिए दो वेबसाईट किसी और से बनबा चुके हैं और दोनों ही वेबसाईट पर एक भी रिपोर्टर ने रजिस्टर नहीं किया था। उनसे जब मैंने पुछा कि आप तीसरी वेबसाईट क्यूँ बनबा रहे हैं? तो उनका कहना था कि उनको पहले वाली दोनों वेबसाईट पसंद नहीं आयीं हैं। यह जबाब तो मुझे समझ में आ गया पर जब मैंने पुछा कि जब उन वेबसाईट में एक भी रिपोर्टर ने एप्लाई नहीं किया तो इस नई वेबसाईट में क्यूँ करेंगे? वो निरुत्तर थे।

आज वेबसाईट को बने हुए तीन दिन हो गए हैं और वेबसाईट पर कोई न्यूज नहीं है, और भविष्य में आने की कोई उम्मीद भी नहीं है। यदि इन्होने भी समय रहते कुछ नहीं किया तो इनको भी कुछ समय बाद वेबसाईट बंद करनी पड़ेगी।

इन दो उदाहरण को देने के पीछे मेरा मकसद इनको नीचा दिखाना नही है, पर एक वेबसाईट को बनाने के लिए आप अपना समय, रुपये तथा दिमाग देते हैं और सिर्फ बिजनेस प्लान की कमी की वजह से उसको बंद करना पड़ता है। यदि आप थोडा समय बिजनेस प्लान को भी दे दें तो आपको बहुत फायदा होगा।

याद रखिये-

वेबसाईट बनाना बड़ी बात नहीं है बड़ी बात है उसको अपने बिजनेस के लिए काम में लाना उससे रुपये बनाना, जिसके लिए एक अच्छा प्लान चाहिए होता है।

यदि आप भी वेबसाईट बनबाने या बनाने की सोच रहे हैं तो एक बार बिजनेस प्लान के बारे में भी सोच लें। नहीं तो किसी एक्सपर्ट से सलाह लें जिससे आपको आगे नुकसान ना हो।

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वेबसाईट बिजनेस नहीं है, यह एक औजार है
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Ph.D. (IIT Bombay), M.Tech., B.Tech. (CSE) Dr. Yogendra Pal finished his Ph.D. from Educational Technology department at IIT Bombay. Mr. Pal holds B.Tech. and M.Tech. Degrees in Computer Science and Engineering. His interests include programming, web development, graphic design and educational technology.

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